मंगलवार, 2 सितंबर 2014

इंटरनेट फ्रॉड से मोबाइल उपभोक्ता और ब्लॉग के सुधि पाठक सतर्क रहें

आजकल सारी दुनिया साइबर क्राइम से त्रस्त और आतंकित है। आप यदि क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो भी विशेष सावधानी बरतें। हो सकता है कि कोई आपसे आपके मोबाइल पर संपर्क कर कर अपने को बैंक का अधिकारी या क्रेडिट  कार्ड कंपनी का प्रतिनिधि बताए तथा आपके अकाउंट के वेरिफिकेशन चेक करने की बात कह कर आपसे पासवर्ड और अकाउंट नंबर की गोपनीय जानकारी हासिल कर ले। कई बार ये लोग आपको 20 से 30 प्रतिशत तक का अतिरिक्त छूट पाने के लिए प्रीविलेज कार्ड दिलाने के नाम पर भी ऐसी ठगी करते हैं। आए दिन अखबारों में ऐसी खबरें भी छपतीं हैं कि कार्ड को वेरिफ़ाई न करवाने पर उसे ब्लॉक कर देने का डर दिखाकर उपभोक्ता से उनके कार्ड के पिन और ओटीपी जैसे गोपनीय कोड की जानकारी हासिल कर उनके खाते से धन राशि निकाल ली जाती है। कई बार लॉटरी लगने  या  विदेशों में पड़ी संपत्ति का भागीदार बनाने के नाम पर भी लोगो को फंसाया जाता है। अभी कुछ दिनों से मेरे ब्लॉग पर भी किसी कमबख्त ने इन्टरनेट से पैसे कमाने की तरकीब बताने के लिए कोई लिंक को एक्टिवेट कर दिया है जो मेरा ब्लॉग खुलते ही स्वतः स्क्रीन पर अपनी जगह बना लेता है। और हटाने से भी नहीं हटता । मैं अपने ब्लॉग के  सभी सुधि पाठकों को सचेत कर देना चाहता हूँ कि उक्त पॉप अप विंडो किसी दूषित मालवेयर या वाइरस की वजह से है और मेरा उससे कोई संबंध नहीं है । पाठक किसी भ्रम में न रहें तथा उस पॉप विंडो में बताए किसी भी लिंक पर जाकर कोई जोखिम न उठाएँ। इससे  होने वाले किसी भी नुकसान के लिए यह ब्लॉग लेखक उत्तरदायी नहीं होगा।  

गुरुवार, 2 जनवरी 2014

NOV.13 HINDI PRABODH PRAVEEN & PRAGYA EXAM. RESULT PUBLISHED


हिन्दी शिक्षण योजना , राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय,भारत सरकार) द्वारा नवंबर, 2013 में आयोजित हिन्दी प्रबोध ,प्रवीण एवं प्राज्ञ परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिये गए हैं , परीक्षार्थी अपने क्षेत्र (पूर्व , पश्चिम आदि ) के आधार पर नीचे दिये लिंक से परीक्षा परिणाम डाउनलोड कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल के परीक्षार्थी कृपया अपना क्षेत्र पूर्व (East) चुने तथा प्रबोध ,प्रवीण एवं प्राज्ञ में से  जिस स्तर की परीक्षा में बैठे थे, उस पर क्लिक करें-
(परीक्षार्थी  find option में जाकर भी अपना रोल नंबर टाइप कर तुरंत परिणाम देख सकते हैं) -
  For Prabodh Result - 
http://rajbhasha.nic.in/e1nov13.pdf
 For Praveen Result - 
http://rajbhasha.nic.in/e2nov13.pdf
For Pragya Result - 
 http://rajbhasha.nic.in/e3nov13.pdf

मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) में केंद्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद,नई दिल्ली की एक नई शाखा का गठन



 
केंद्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद,नई दिल्ली की एक नई  शाखा का गठन हाल ही में दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) में किया गया है। शाखा के उदघाटन सहित इसकी प्रथम औपचारिक बैठक का आयोजन नेशनल पावर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ,दुर्गापुर के तत्वावधान में दिनांक 08/12/2013 को किया गया। इस प्रथम बैठक को समिति के अन्य कार्यकारिणी सदस्यों एवं पदाधिकारियों के अतिरिक्त श्री विमल कुमार जैन,प्रबन्धक (अभियांत्रिकी), इंडियन ऑइल कार्पोरेशन, श्री सुनील कुमार श्रीवास्तव (उप निदेशक,एनपीटीआई) तथा श्री विश्वजीत मजूमदार (प्राध्यापक,हिशियो, राजभाषा विभाग,गृह मंत्रालय) ने भी संबोधित किया। समिति के कार्यकलापों पर प्रकाश डालते हुए संरक्षक श्री सुभाष चंद्र मिश्र (पूर्व प्रबन्धक एवं पूर्व सचिव,नराकास,दुर्गापुर इस्पात संयंत्र) और मंत्री श्री रमेश प्रसाद (शाखा प्रबन्धक,यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया) ने कहा कि परिषद का मुख्यालय एक्स वाई -68,सरोजिनी नगर,नई दिल्ली-23 में स्थित है। इसकी स्थापना 3 मार्च 1960 को श्री हरिबाबू कंसल के द्वारा की गई थी। परिषद का ध्येय सरकारी कामकाज में हिन्दी का प्रयोग बढ़ाना है। दिल्ली के अतिरिक्त भारत के अनेक शहरों में इसकी सैकड़ों शाखाएँ हैं। केंद्रीय सरकार के कार्यालयों,राष्ट्रीयकृत बैंकों,उपक्रमों तथा सरकारी निगमों और स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारी/अधिकारी इसके सदस्य हो सकते हैं। सभी सदस्यों को “हिन्दी परिचय” पत्रिका निशुल्क तथा अन्य प्रकाशन रियायती मूल्य पर दिये जाते हैं। परिषद की कुछ योजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय (शिक्षा विभाग) से अनुदान भी मिलता है। कथाकार श्री सुभाष रंजन, कवि श्री मृत्युंजय तिवारी, सांस्कृतिक कार्यकर्ता श्री रणजीत कुमार और कार्टूनिस्ट हरिसिंह ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे। शाखा की अगली बैठक में भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार किए जाने का संकल्प लिया गया है।

सोमवार, 16 सितंबर 2013

हिन्दी दिवस पर विशेष


आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत में स्थित मेलबोर्न शहर के एक ट्राम के सामने सुरक्षा संदेश देने के लिए हिन्दी भाषा का प्रयोग चकित करने वाला है , हम भारत वासी अपनी राष्ट्र भाषा और राजभाषा " हिन्दी " का सम्मान करना आखिर कब सीखेंगे.......?

गुरुवार, 5 सितंबर 2013

गुरु महिमा


               श्री गुरूवै नमः                

 
गुमनामी के अंधेरे में था
पहचान बना दिया
दुनिया के गम से मुझे

अनजान बना दिया

उनकी ऐसी कृपा हुई
गुरू ने मुझे एक अच्छा
इंसान बना दिया ..............................

 

 हम साक्षर न होते तो किताबें कौन पढ़ता
आपके खिले चेहरे को कमल कौन कहता
यह तो करिश्मा है शिक्षक दिवस का
रना पत्थर के मकबरे को ताजमहल कौन कहता ...........?



गुरू ब्रम्हा, गुरू विष्णु, गुरू देवो महेश्वरा
गुरू साक्षात परम्ब्रम्ह तस्मय श्री गुरूवनमः

(नोट- उक्त सुंदर पदयांश इंटरनेट के  किसी साइट से  डाउनलोड कर मेरे एक पूर्व प्रशिक्षार्थी श्री अमर कुमार शर्मा ने शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर मुझे समर्पित किया है, मैं उनका आभार प्रकट करते हुए  आंशिक संशोधन के साथ इसे मैं पुनः आप सभी को समर्पित कर रहा हूँ। उस अनाम कवि  को भी साधुवाद जिन्होने अतीव सुंदर भाव समाहित इन पंक्तियों  को लिख कर गुरुओं का मान बढ़ाया ....!- ब्लॉग लेखक )

शनिवार, 29 जून 2013

Prabodh Praveen Pragya Exam॰Result, May 2013

प्रबोध ,प्रवीण एवं प्राज्ञ परीक्षाओं के परिणाम
 
 
हिन्दी शिक्षण योजना ,राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय,भारत सरकार) द्वारा मई 2013 में आयोजित हिन्दी प्रबोध ,प्रवीण एवं प्राज्ञ परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिये गए हैं , परीक्षार्थी अपने क्षेत्र (पूर्व , पश्चिम आदि ) के आधार पर नीचे दिये लिंक से परीक्षा परिणाम डाउनलोड कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल के परीक्षार्थी कृपया अपना क्षेत्र पूर्व (East) चुने तथा प्रबोध ,प्रवीण एवं प्राज्ञ में से  जिस स्तर की परीक्षा में बैठे थे, उस पर क्लिक करें ( परीक्षार्थी  find option में जाकर अपना रोल नंबर टाइप कर तुरंत परिणाम देख सकते हैं।) -
 
For Prabodh Result - 
For Praveen Result - 
http://rajbhasha.nic.in/e2may13.pdf

For Pragya Result - 
 http://rajbhasha.nic.in/e3may13.pdf

शनिवार, 6 अप्रैल 2013

Me, Borishailla : The Epic Saga Of The Rise Of Bangladesh Written by Dr. Mahua Maji

एक पठनीय कालजयी उपन्यास
   डॉ॰ महुआ माजी कृत बांग्लादेश के अभ्युदय की महागाथा
     मैं बोरिशाइल्ला
हाल ही में मुझे डॉ॰ महुआ माजी कृत “मैं बोरिशाइल्ला” उपन्यास पढ़ने को मिला। युवा लेखिका ने अपने विस्तृत शोध और पारिवारिक स्रोतों से मिली जानकारी को अपनी लेखकीय कल्पना शक्ति से कथारूप देकर कलमबद्ध कर इसे “बांग्लादेश के अभ्युदय की महागाथा” की संज्ञा दी है। इसकी प्रामाणिकता असंदिग्ध है। उन्नीस सौ सैंतालीस से लेकर  सत्तर के दशक तक बांग्लादेश के लाखों बेघर हुए बंगाली जो युद्धकाल में पलायन कर भारत में आ बसे थे, उनकी संततियाँ आज भी उस अमानवीय यातना को भूल नहीं पाई है। जिन लोगों ने उस पीड़ा को साक्षात भोगा है, उनकी जुबान को ही लेखिका ने कथा नायक केष्टो घोष के माध्यम से आकार दिया है। बंगभंग पर हिन्दी में इससे पहले इतने व्यापक फ़लक पर किसी ने रचनाकार ने कोई उपन्यास लिखा हो ऐसी मेरी जानकारी में तो कम से कम नहीं है। हाँ, यशपाल के “झूठा-सच” नामक वृहदाकार उपन्यास में अवश्य स्वाधीनता आंदोलन और भारत-पाक विभाजन की त्रासद घटना  को अत्यंत मार्मिक और प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत किया गया है। चूंकि यशपाल स्वयं तत्कालीन सशस्त्र क्रांतिकारी आंदोलन के एक अभिन्न अंग थे और वामपंथी विचारधारा के पैरोकार थे, इसलिए उनकी लेखनी की धार स्वाभाविक रूप से तेज़ थी। पर महुआ माजी ने न तो उस क्षण को जिया है , न भोगा है, न ही देखा है। मुझे आश्चर्य इस बात पर भी है कि झारखंड के रांची प्रांत मे रहकर भी उन्होने बांग्लादेश (तत्समय पूर्वी बंगाल) की प्राकृतिक परिस्थितियों का इतना विशद और जीवंत वर्णन कैसे किया है। बदलती ऋतुओं के साथ साथ शस्य श्यामला बंगदेश की ग्रामीण पृष्ठभूमि और उसके नैसर्गिक सौंदर्य का ऐसा अद्भुत बारहमासा विवरण किसी चमत्कार से कम नहीं। उल्लेखनीय है कि लेखिका का यह पहला उपन्यास होते हुए भी विश्वस्तर पर चर्चित,प्रशंसित और पुरस्कृत हुआ है। जिसमें अंतराष्ट्रीय कथा यू॰के॰ सम्मान(2007),अखिल भारतीय वीर सिंह देव सम्मान(2010),विश्व हिन्दी सेवा सम्मान (2010), तथा “झारखंड रत्न” सम्मान आदि शामिल है, संभवतः इतनी लोकप्रियता उनके द्वारा रचित दूसरे उपन्यास “मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ” को भी नहीं मिली होगी । उम्मीद है अमृता प्रीतम,मन्नू भण्डारी,ममता कालिया,उषा प्रियंबदा.......... आदि महिला कथाकारों की लंबी सूची में अब महुआ माजी का नाम भी आदर से लिया जाएगा।   

गुरुवार, 3 जनवरी 2013

Prabodh Praveen Pragya Examination Result, November 2012



हिन्दी शिक्षण योजना ,राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय,भारत सरकार) द्वारा नवंबर 2012 में आयोजित हिन्दी प्रबोध ,प्रवीण एवं प्राज्ञ परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिये गए हैं , परीक्षार्थी अपने क्षेत्र (पूर्व , पश्चिम आदि ) के आधार पर नीचे दिये लिंक से परीक्षा परिणाम डाउनलोड कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल के परीक्षार्थी कृपया अपना क्षेत्र पूर्व (East) चुने तथा जिस स्तर की परीक्षा में बैठे थे , उस पर क्लिक करें-

Prabodh Praveen Pragya Examination Result, November 2012

 

शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

हिन्दी दिवस राष्ट्रीय अस्मिता और आत्मगौरव का दिवस है


कर लें हिंदी का संधान*
कर लें हिंदी का संधान
रहे विरोध ना कोई
उत्तर दक्षिण का भान
कर लें हिंदी का संधान......
 
हम सब भारतवासी हैं
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है
यही है जो जन-जन में
नित्य जगाती आशा है
राष्ट्रपिता ने सदा किया
इस भाषा का गुणगान
कर लें हिंदी का संधान
गाँधी, बोस, तिलक ने
इस भाषा का अलख जगाया था
स्वतंत्रता संग्राम के वीरों ने
इस भाषा को अपनाया था
आत्मसात कर लें इसको
हम काम ये बड़ा महान
कर लें हिंदी का संधान.....
 
यही है वो संपर्क की भाषा
संस्कृत इसका मूल है
देवनागरी लिपि में लिखी जाती यह भाषा
सदा बढ़ाती राष्ट्र का मान है
प्रांत , जाति और धर्म से ऊपर
सदा ही राष्ट्रभाषा होती है
भाषाई अंतर को कम कर
वेणी नया पिरोती है
कोमल भाषा मीठी बोली
हिंदी कविता का परिधान
कर लें हिंदी का संधान.......

लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ ने
इसका विकास किया
बालीवूड ने भी बढ़चढ़कर 
इस भाषा का व्यवहार किया
चलचित्र ने माध्यम बनकर
इसका देशदेशांतर में प्रसार किया
मत भूलो ऐ! हिंद के वासी
इसकी सुरीली मीठी तान
कर लें हिंदी का संधान......
 
क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दों को भी
सहजता से गले लगाती हिंदी
अरब लोगों के द्वारा
बोली जाती हिंदी
सुन लो देश के वासी
हिंदी भाषा का पैगाम
कर लें हिंदी का संधान......

हिन्दी दिवस द्वारा ही सही
इसकी महत्ता को हम सब स्मृत कर लेते हैं
किन्तु समापन के साथ
हम इसको विस्मृत भी कर देते हैं
फिर हाथों में अँग्रेजी की बैसाखी लेकर
हिन्दी का मान घटाते हैं
लें आज संकल्प ऐसा कि
निष्ठापूर्वक वर्षभर
करें हिंदी में हम सब काम
कर लें हिंदी का संधान...
 (*वेब पर उपलब्ध हुई किसी अनाम कवि की  कविता का संस्कार कर इसे सुधि हिन्दी प्रेमी पाठकों के लिए पुनर्प्रस्तुत कर रहा हूँ - ब्लॉग लेखक )

शुक्रवार, 29 जून 2012

राजभाषा विभाग द्वारा मई ,2012 में आयोजित हिन्दी प्रबोध ,प्रवीण एवं प्राज्ञ परीक्षाओं के परिणाम घोषित


केंद्रीय सरकार के हिंदीतर भाषी कर्मचारियों/अधिकारियों के लिए हिन्दी शिक्षण योजना,राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय,भारत सरकार) द्वारा प्रबोध प्रवीण एवं प्राज्ञ परीक्षाओं का आयोजन क्रमशः 22 , 23 एवं 24  मई  2012  को देश के विभिन्न परीक्षा केन्द्रों में किया गया था। उक्त परीक्षाओं के परिणाम 29 जून 2012  को राजभाषा विभाग के वेब-साइट- http://www.rajbhasha.nic.in/hindiexam.htm
पर प्रकाशित किए गए हैं , दुर्गापुर केंद्र से इन परीक्षाओं में शामिल हुए परीक्षार्थी अपना परीक्षा-फल इस ब्लॉग पर दिये गए निम्नलिखित लिंक पर क्लिक कर सीधे भी देख सकते हैं-
PRABODH प्रबोध के लिए लिंक-
http://rajbhasha.nic.in/e1may12.pdf
PRAVEEN प्रवीण के लिए लिंक-
http://rajbhasha.nic.in/e2may12.pdf
PRAGYA प्राज्ञ के लिए लिंक-
http://rajbhasha.nic.in/e3may12.pdf

सभी सफल परीक्षार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएँ ।
नए सत्र की हिन्दी प्रशिक्षण कक्षाएं 02 जुलाई 2012 से प्रारम्भ हो चुकी हैं

बुधवार, 2 मई 2012

कम्प्युटर पर हिन्दी में कार्य करने के लिए उपयोगी सॉफ्टवेयरों पर नराकास स्तरीय राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन

नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति(नराकास) ,दुर्गापुर के सौजन्य से राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान (पूर्वी क्षेत्र),दुर्गापुर द्वारा दिनांक 28 मार्च 2012 को एकदिवसीय नराकास स्तरीय  राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। एनपीटीआई के एसआईटी हाल में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था-"राजभाषा विभाग एवं अन्य संस्थानों द्वारा निर्मित हिन्दी सॉफ्टवेयर एवं प्रौद्योगिकी विकास"। सीएमईआरआई (सीएसआईआर) के पूर्व निदेशक डॉ॰ वी॰के॰ सिन्हा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे,अन्य विशिष्ट अतिथियों में दुर्गापुर इस्पात संयंत्र के उपमहाप्रबंधक (प्रशासन /कार्मिक)श्री संदीप माथुर तथा एनपीटीआई के उपनिदेशक (तकनीकी) श्री एस॰के॰ श्रीवास्तव मौजूद थे। संकाय सदस्य के रूप में आलोच्य विषय पर प्रकाश डालने के लिए श्री साकेत सहाय ,राजभाषा अधिकारी ,ओबीसी तथा श्री विश्वजीत मजूमदार ,प्राध्यापक,राजभाषा विभाग उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में दुर्गापुर के विभिन्न कार्यालयों से आए हुये प्रतिनिधियों को हिन्दी यूनिकोड में कार्य हेतु आईएमई ,वर्चुअल फोनेटिक सहित  हिन्दी से जुड़े विविध सॉफ्ट वेयरों की जानकारी स्लाइड शो के माध्यम से तथा इंटरनेट के माध्यम से दी गई,जिसे सभी प्रतिभागियों ने अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।

गुरुवार, 22 मार्च 2012

भारत में नागर विमानन के सौ वर्ष


आदिम युग से मनुष्य लगातार अपने में परामानवीय शक्तियों के विकास की इच्छा लेकर नित नवीन प्रयोग करता रहा है। जल में चलने की अभिलाषा ने डोंगी से नाव और नाव से जलजहाज का विकास किया। खुले आकाश में उड़ते पंछियों को देखकर इंसान को भी उड़ने की हसरत ज़रूर हुई होगी तभी तो राइट बंधुओं ने उड़ने की कोशिश में अपनी जान को खतरे में डाला होगा। प्राचीन ग्रन्थों में भी हम इस बात का उल्लेख पाते हैं कि देवताओं और असुरों के पास उड़ने की नैसर्गिक शक्ति थी। तुलसीदासकृत श्रीरामचरित मानस में भी इस बात का उल्लेख है कि लंका नरेश रावण सीता माता का अपहरण कर अपने पुष्पक विमान में बिठाकर आकाश मार्ग से लंका ले जाता है। भगवान श्रीराम लंका विजय कर जब सीताजी को लेकर इसी पुष्पक विमान से अयोध्या लौटेते हैं तो             आवत देखि लोग सब कृपासिंधु भगवान।
              नगर  निकट प्रभु प्रेरेउ  भूमि   बिमान।।  (4क/उत्तरकाण्ड)

(भावार्थ- कृपासागर भगवान् श्रीरामचन्द्रजी ने सब लोगों को आते देखा, तो उन्होने विमान को नगर के समीप उतरने को प्रेरित किया। तब वह विमान पृथ्वी पर उतरा।)
इसीतरह-
                             उतरि कहेउ प्रभु पुष्पकहि तुम्ह कुबेर पहिं जाहु।
              प्रेरित  राम चलेउ  सो  हरषु  बिरहु अति  ताहु।। (4ख/उत्तरकाण्ड)

(भावार्थ- विमान से उतरकर प्रभु ने पुष्पक विमान से कहा कि तुम अब कुबेर के पास जाओ। श्रीरामजी की प्रेरणा से वाहक चला । उसे, [अपने स्वामी के पास जाने का] हर्ष है और प्रभु श्रीरामचन्द्रजी से अलग होने का अत्यन्त दुःख भी है।)

इस दृष्टांत से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि पुष्पक विमान आज के अत्याधुनिक मानवरहित स्वचालित विमानो या ड्रोन जैसे रेडार संचालित यानों की तरह ही था जो मौखिक आदेशों या केवल हाथ के इशारों से नियंत्रित किया जा सकता था।
अगर इन पौराणिक कथाओं की सत्यता पर किसी को सदेह भी हो तो भी इस बात पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए कि अगर यह महज कवि की कल्पना भी हो तो भी ऐसी इच्छाओं ने ही तो हमें आकाश में उड़ने की प्रेरणा दी है। कहा भी गया है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।
·         नागर विमानन की आवश्यकता और महत्व
परिवहन के क्षेत्र में नागर विमानन या हवाई यात्रा का अपना एक अलग महत्व है क्योंकि परिवाहन के अन्य साधन यथा घोड़ा,खच्चर,ऊंट,बैलगाड़ी,साइकिल,जीप,बस,कार,रेल,डोंगी,नाव,स्टीमर,जलजहाज या पनडुब्बी जैसे परंपरागत या आधुनिक साधन हों या मेट्रो और बुलेट ट्रेनों की भांति अत्याधुनिक माध्यम हों,इन सबमें हेलिकॉप्टर और हवाई जहाज का स्थान सर्वोपरि है। केवल नभचर प्राणी ही आकाश मार्ग का प्रयोग करते हैं । वे भी ज़्यादा तेज़ गति से लगातार उतनी ऊंची उड़ान नहीं भर सकते जितना कोई वायुयान भर सकता है। यह नदी,पहाड़,पर्वत और समुद्र के प्राकृतिक बंधनों से मुक्त होने तथा भूकंप,भूस्खलन,बाढ़ आदि आपदाओं से अप्रभावित हने के कारण स्वाभाविक रूप से आवागमन का सर्वोत्तम विकल्प है। दिनोंदिन बढ़ती आबादी ने सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार पर अंकुश लगा रखा है और नए हाइवे,एक्सप्रेस हाइवे या फ़्लाइओवर भी इस समस्या से निजात दिलाने में नाकाफी साबित हो रहे हैं। जलमार्ग को इनका विकल्प भी नहीं बनाया जा सकता क्योंकि इसकी अपनी सीमाएं हैं। कुलमिलाकर निष्कर्ष यही निकलता है कि नागर विमानन आज हमारी ज़रूरत ही नहीं अनिवार्यता भी बन गई है।
·         भारत में नागर विमानन का इतिहास
हमारे देश में नागर विमानन का इतिहास करीब 100 वर्ष पुराना है। सर्वप्रथम 1910 में पटियाला के तत्कालीन युवा महाराज भूपिंदर सिंह ने अपने चीफ इंजीनियर को यूरोप भेजकर अपने उपयोग के लिए एक विमान खरीदवाया था ,जो संभवतः भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया महादीप में किसी भी व्यक्ति द्वारा खरीदा गया पहला निजी विमान था। उसके अगले ही वर्ष अर्थात 1911 में 18 फरवरी को हेनरी पिकेट ने इलाहाबाद से नैनी तक व्यावसायिक उड़ान भरी जो भारत की पहली घरेलू व्यापारिक उड़ान थी। इसतरह यह भारत में नागर विमानन का शताब्दी वर्ष है।
·         भारत में नागर विमानन का क्रमिक विस्तार
भारत मे नागर विमानन के इन सौ सालों को अगर कालक्रमानुसार अवलोकन करें तो पाएंगे कि धीरे धीरे ही सही पर हमने क्रमशः नागर विमानन के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की है। 1927 में हमारा देश अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवा से जुड़ा जब ब्रिटेन की इंपीरियल एयरवेज़ ने अपनी हवाई सेवा का विस्तार करते हुए काइरो-बसरा-कराची होते हुए जोधपुर –दिल्ली तक विमान सेवा उपलब्ध कराई। एक प्रकार से भारत में पहली घरेलू हवाई सेवा देने वाली कंपनी भी यही विदेशी संस्था थी। 1932 में युगपुरुष जे॰आर॰डी॰ टाटा ने पहली अधिसूचित एयरलाइन् टाटा एयरलाइन्स की स्थापना की। भारत के नागर विमानन के इतिहास में यह एक क्रांतिकारी कदम था। टाटा एयरलाइन्स की पहली उड़ान उन्होने स्वयं ही भरी और कराची से विमान उड़ाकर अहमदाबाद होते हुए उसे बंबई (अब मुंबई) लेकर आए। टाटा एयरलाइन्स  की कमाई का मुख्य जरिया तब एयरमेल वाहक के रूप में ही था क्योंकि हवाई यात्रा अत्यधिक ख़र्चीली होती थी। फिर भी टाटा एयरलाइन्स ने शुरुवाती एक साल में ही 1.6 मील की कुल उड़ान भरी,10.71 टन की माल ढुलाई की तथा 155 यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचाया। मुंबई से त्रिवेन्द्रम तक लंबी दूरी की हवाई सुविधा प्रदान करने वाली यही पहली देशी कंपनी थी। ब्रिटिश संस्था से पहला भारतीय पालट लाइसेन्स पाने वाले व्यक्ति भी और कोई नहीं बल्कि जे॰आर॰डी॰ टाटा ही थे।
1945 में डेक्कन एयरवेज़ के रूप में हैदराबाद के निज़ाम ने टाटा संस की एक तिहाई भागीदारी के साथ अपनी एयरलाइंस सेवा शुरू की,जो टाटा एयरलाइन्स के बाद भारत की दूसरी निजी कंपनी थी। अपने 12 जहाज़ी बेड़ों के साथ जुलाई 1946 में डेक्कन एयरवेज़ने हैदराबाद प्रांत में अपनी पहली उड़ान भरी। पहली महिला कमर्शियल पायलट प्रेम माथुर ने 1951 में इसी डेक्कन एयरवेज़ में कार्यारंभ किया था।
1947 में टाटा एयरलाइन्स का नाम बदलकर एयर इंडिया कार दिया गया। भारत सरकार के साथ संयुक्त उद्यम के रूप में ` 2 करोड़ की पूंजी के साथ 8 मार्च 1948 को एक और कंपनी गठित की गई,जिसका नाम एयर इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड रखा गया । इसकी स्थापना के पीछे मकसद यह था कि भारत में भी घरेलू उड़ानों के साथ साथ अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए विमान सेवा हो। हालांकि इस नई कंपनी के पास तब केवल तीन ही एयरक्राफ्ट थे । इसने अपनी पहली उड़ान 8 जून 1948 को भरी तथा बंबई (अब मुंबई) से काइरो और ज़िनेवा होते हुए लंदन का सफर तय किया। विदेशी एयरपोर्ट पर किसी भारतीय कंपनी का लैंडिंग करने वाला यह पहला विमान था ! 1960 में इसने जेट-युग में प्रवेश किया।अब इसके पास अत्याधुनिक 707-437 जेट बोइंग विमान यात्री सेवा के लिए उपलब्ध हो गए थे।
·         नागर विमानन की चुनौतियाँ
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उपजी परिस्थितियों से कई घरेलू एयरलाइंस कंपनियाँ वित्तीय संकट के दौर से गुज़र रही थी  जो नागर विमानन सेवा के लिए चिंता की बात थी । समस्याओं से निजात पाने के लिए 1950 में सरकार ने एक एयर ट्राफिक इंक्वैरि कमिटी गठित की,जिसने सुझाव दिया कि  सभी घरेलू निजी एयरलाइंस कंपनियों का स्वेच्छिक आधार पर राष्ट्रीयकरण कर दिया जाना चाहिए। हालांकि अनेक एयरलाइंस कंपनियां इस प्रस्ताव से बिलकुल सहमत नहीं थी लेकिन अंततः   1953 में इन सभी घरेलू निजी एयरलाइंस कंपनियों का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला लिया गया । जिसके फलस्वरूप तत्कालीन 08(आठ) निजी एयरलाइंस कंपनियों का विलय कर इंडियन एयरलाइन्स कार्पोरेशन की स्थापना की गई। ये आठ  घरेलू एयरलाइंस कंपनियाँ थीं- 1. डेक्कन एयरवेज़ 2. एयरवेज़ इंडिया 3. भारत एयरवेज़ 4॰ हिमालय एविएशन 5. कलिंगा एयरलाइन्स 6. इंडियन नेशनल एयरवेज 7. एयर इंडिया तथा 8. एयर सर्विसेज ऑफ इंडिया ।
·         नारी सशक्तिकरण में नागर विमानन की भूमिका
घरेलू उड़ानों के लिए बनी कंपनी इंडियन एयरलाइन्स कार्पोरेशनके पास तब 74 डीसी -3,12 विकिंग्स,3 डीसी-4 तथा कोई छोटे एयरक्राफ्ट थे। 1956 में दुर्बा बनर्जी इंडियन एयरलाइन्स की पहली महिला पायलट बनीं। एविएशन सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में इंडियन एयरलाइन्स का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 1985 में कैप्टन सौदामिनी देशमुख के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कोलकाता से सिलचर(असम) की फ्लाइट में Fokker Friendship F-27 विमान के सभी क्रू मेम्बर महिलाएं ही थीं। सितंबर 1989 मे मुंबई –गोवा सैक्टर में बोइंग को चलाने वाली पायलट भी कैप्टन सौदामिनी देशमुख ही थीं तथा सभी क्रू मेम्बर भी महिलाएं ही थीं। पहली बार किसी महिला पायलट द्वारा IC-492 जेट विमान को मुंबई –औरंगाबाद-उदयपुर रूट पर उड़ाने का कारनामा सच कर दिखाया था ,इसी  इंडियन एयरलाइन्स की 26 वर्षीया युवा पायलट कैप्टन निवेदिता भसीन ने। उनके नाम ही एयरबस A-300 एयरक्राफ्ट की पहली भारतीय महिला चेक पायलट बनने का भी रिकॉर्ड दर्ज़ है। इसप्रकार महिला सशक्तिकरण की दिशा मे भी नागर विमानन का भी अभिनव योगदान है।
            भारत के नागर विमानन के इतिहास में एयर इंडिया के नाम भी एक गौरवशाली पृष्ठ है। प्रथम खाड़ी युद्ध से ठीक पहले अम्मान से मुंबई के बीच 59 दिनों में 488 फ्लाइट चलाकर 1,11,000 (एक लाख ग्यारह हज़ार) नागरिकों को सुरक्षित भारत लाया गया। यह विश्व कीर्तिमान गिनीस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में भी दर्ज़ है।  
·         सरकार की नागर विमानन नीति
 अप्रेल 1990 में सरकार ने वैश्वविक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने,हवाई सेवाओं का विस्तार करने तथा उड्डयन के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की मूल संकल्पना के साथ ओपन स्काइ पॉलिसी लागू की । इस पॉलिसी की विशेषता यह थी कि कोई भी देशी विदेशी निजी एयर टॅक्सी ऑपरेटर भारत के किसी भी एयरपोर्ट से उड़ान भरने या उतरने की सुविधा के साथ अपनी सुविधानुसार मालभाड़ा व यात्री किराया तय करने,उड़ान का शेड्यूल बनाने आदि की छूट कुछ शर्तों के साथ पा सकता था। अबतक यही धारणा थी कि जिन राष्ट्रों के पास नागर विमानन के लिए उपयुक्त इनफ्रास्ट्रक्चर नहीं है वे ही अपनी विवशता के चलते ओपन स्काइ पॉलिसी का सहारा लेते हैं। ब्रिटेन,अमेरिका,जापान,आस्ट्रेलिया  जैसे कई सम्पन्न देशों में इस पॉलिसी का अस्तित्व न होने से ऐसी धारणा बनना स्वाभाविक ही था। बहुत लोगों को इस पॉलिसी से इसलिए भी एतराज था क्योंकि इससे देश की संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा हो सकता था। पर सरकार ने इसे जब तमाम विरोधों के बावजूद लागू किया तो परिणाम सकारात्मक ही रहे। इससे 37 वर्षों से इंडियन एयरलाइंस का नागर विमानन के क्षेत्र में बना एकाधिकार टूट गया तथा ईस्ट-वेस्ट एयरलाइंस ने प्रतिस्पर्धी कंपनी के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराई । बाद में एक के बाद कई निजी एयरलाइंस ऑपरेटरों के मैदान में आ जाने से समूचा वातावरण कड़ी प्रतिस्पर्धा का हो गया तथा यात्री किराया और यात्री सुविधाओं के बारे में उड्डयन कम्पनियाँ ज़्यादा सचेत हो गईं।
01 अप्रेल 1995 को सरकार ने एक और पहल की। इस तिथि को इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और नेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को मिलाकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया का गठन किया गया। तब से इसी प्राधिकरण के पास विमानपत्तनों की देखरेख ,ढांचागत सुधार आदि का जिम्मा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधीन वर्तमान में 122 एयरपोर्ट हैं ,जिनमें से 61 प्रचालन में हैं । इनमें से 11 अंतर्राष्ट्रीय ,94  घरेलू तथा 27 डिफेंस के सिविल एंक्लेव हैं।(आंकड़ों में अंतर हो सकता है।) टियर -2 तथा टियर-3 के कुछ शहरों में अगले कुछ वर्षों में और भी नए एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं जिससे नागर विमानन का विस्तार दूर दराज़ के इलाकों तक हो सकेगा।
·         भारत में नागर विमानन का भविष्य -
काफी वर्षों तक हवाई यात्रा भारतियों के लिए एक स्वप्न जैसा ही था। हवाई यात्रा करने वालों की समाज में एक विशिष्ट पहचान थी। इसे विलासिता और वैभव का प्रतीक माना जाता था। विमान में सवार होने वाले केवल धनकुबेर,बड़े नौकरशाह और राजनेता की आवभगत के लिए ही महाराजा के सिर झुके और हाथ स्वागत में फैले हुए होते थे। साधारण जन तो आकाश में उड़ते विमान को ही कौतूहल के साथ देख कर प्रसन्न हो लेते थे । पर अब ऐसी बात नहीं रही। लो-कास्ट एयरलाइंस या बजट कैरियर ने मध्यम आय वर्गीय लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है। पब्लिक और प्राइवेट ऑपरेटरों में यदि स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक भावना बनी रहे तो आने वाले दिनों में विमान की सवारी और भी आकर्षक हो सकती है। हालांकि एविएशन फ्युल की बढ़ती कीमतें,खाड़ी देशों में अशांति,राजनैतिक अस्थिरता,आए दिन वेतन-भत्तों आदि को लेकर विमानन कर्मचारियों और पायलटों के हड़ताल,रुपये और डॉलर की कीमतों में अंतर से एयरलाइंस कंपनियों का वित्तीय घाटा बढ़ना  तथा आतंकवादी हमलों की बढ़ती आशंका सहित परोक्ष अपरोक्ष अनेक कारणों से यह सेक्टर अभी भी काफी समस्याओं से जूझ रहा है,लेकिन विगत एक सौ वर्षों का इसका स्वर्णिम इतिहास हमें यह विश्वास दिलाता है कि चुनौतियाँ चाहे जितनी भी कितनी भी कठिन क्यों न हों, भारत में नागर विमानन का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है।